मनचाहा वरदान पाने के लिए अष्टमी के दिन करे महागौरी की पूजा, जानिए कैसे करे पूजा
मनचाहा वरदान पाने के लिए अष्टमी के दिन करे महागौरी
की पूजा, जानिए कैसे करे पूजा
माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का
नाम माता महागौरी है. इनकी उपासना से भक्तों को सभी प्रकार के कल्मष धुल जाते हैं,
पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं.
माता महागौरी की कथा:-
भगवान शिव को पति रूप में पाने
के लिए देवी महागौरी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ जाता है. देवी
की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल
से धोते हैं तब देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं तथा
तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा. माता महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत
और मृदुल दिखती हैं. देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं-
“सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ
साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते”
इस दिन माता के भक्त को माता के
इसी मन्त्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए. यह व्यक्ति की सोच से काफी ज्यादा
फलदायी बताया गया है.
पूजन करने की विधि:-
अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग
के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं. सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर या मंदिर में
देवी महागौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर
उस पर महागौरी यंत्र रखें और यंत्र की स्थापना करें. मां सौंदर्य प्रदान करने वाली
हैं. हाथ में श्वेत पुष्प लेकर मां का ध्यान करें.
अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना
श्रेष्ठ माना गया है. कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए नहीं तो 2 कन्याओं की पूजा करें.
कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से अधिक न हो. भोजन कराने के बाद कन्याओं को
दक्षिणा देनी चाहिए.
स्तोत्र पाठ:
सर्वसंकट
हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्.
ज्ञानदा
चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख
शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्.
डमरूवाद्य
प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल
त्वंहि तापत्रय हारिणीम्.
वददं
चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥


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