भगवान राम के जीवन से हर छात्र को लेनी चाहिये से ये 7 सीख
भगवान राम
के जीवन से हर छात्र को लेनी चाहिये से ये 7 सीख
भगवान राम विनम्र, गरिमामय व आदर्श पुरुष के एक उदाहरण हैं. भगवान
राम, भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं और उनके जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. खासतौर
पर छात्र, उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हैं. रामनवमी के शुभ अवसर पर हम छात्रों
को बता रहे हैं कि भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम से क्या सीख सकते हैं.
1. कभी हार नहीं मानें
भगवान राम के जीवन से यह सीख मिलती है कि जब आप एक लक्ष्य तय करें,
उसपर अड़िग रहें. उससे कभी पीछे ना हटें. सीता को लंका के राजा रावण ने बंदी बना लिया
था और सीता को ढूंढ़ने में राम को बहुत ज्यादा वक्त लगा. लेकिन उन्होंने कभी भी
हार नहीं मानी. अपने लक्ष्य को लेकर राम का दृढ़ निश्चय यह सिखाता है कि हमें
लक्ष्य से पीछे कभी नहीं हटना चाहिये.
2. विनम्र ही सबसे उत्तम नीति है
भगवान राम सबसे कुशल धनुर्धर थे. इसके अलावा उन्हें अस्त्र और
शास्त्रों का गहन ज्ञान भी था. लेकिन उस सारी शक्ति और ज्ञान ने उन्हें अहंकारी नहीं
बनाया. बल्कि वह हमेशा विनम्र रहे. छात्रों को भी विनम्र ही रहना चाहिये.
3. बड़ों का सम्मान करें
भगवान् राम ने कभी अपने माता-पिता के फैसले पर सवाल नहीं उठाया,
भले ही उन्हें 14 वर्ष का बनवास काटना पड़ा. हो सकता है कि माता-पिता का कोई फैसला
आपको उस वक्त ठीक ना लग रहा हो, लेकिन भविष्य के लिये वही अच्छा होगा.
4. शांत रहें
भगवान राम से यह सीखना चाहिये कि कैसे विपरीत परिस्थितियों
में भी खुद को शांत रखा जाता है. उन्होंने कई भयानक राक्षकों का सामना किया और युद्ध
लड़े. जीवन में विपरीत परिस्थितियां तो आएंगी ही लेकिन उनका सामना शांत मन और
दिमाग से करें.
5. पूर्वाग्रह से ग्रसित ना हों
राज्य से निर्वासित होने के बाद जब रावण का भाई विभीषण राम के
पास आया, तो भगवान् राम ने उसे स्वीकार करने में एक भी पल नहीं लगाया. यहां तक कि
विभीषण के अनुयायी भी उसके खिलाफ थे. लेकिन राम ने बिना किसी पूर्वाग्रह के विभीषण
के ज्ञान और विशेषज्ञता का सम्मान किया. आगे चलकर उनका फैसला सही रहा. पूर्वाग्रह
कभी मददगार साबित नहीं होती.
6. अपने साथी के प्रति ईमानदार
भगवान राम ने सीता के अलावा जीवन भर किसी दूसरी महिला के बारे
में नहीं सोचा. एक तरह से देखा जाए तो पूरी रामायण में राम और सीता के प्रेम की ही
कहानी है.
7. दोस्त और दोस्ती की एहमियत समझें
लक्षमण और हनुमान, श्री राम के भाई और भक्त ही नहीं थे, बल्कि
वो उनके सबसे करीबी दोस्त भी थे. और यह उन्होंने बार बार साबित किया. भगवान् राम
के जीवन से ये समझा जा सकता है, कि दोस्तों की क्या एहमियत है. बुरे वक्त में
दोस्त हमेशा काम आते हैं. इसलिये उनका सम्मान करें और उनका साथ भी दें.
Input : News18


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