जानिए, माता दुर्गा के नौ नामों का अर्थ और चैत्र नवरात्र का महत्व
जानिए, माता दुर्गा के नौ नामों का अर्थ और चैत्र
नवरात्र का महत्व
हिंदु धर्म की आस्था माता दुर्गा
में काफी अधिक होती है. माँ दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं और माँ दुर्गा को आदि
शक्ति व बुद्धितत्व की जननी माना जाता है. वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा
करने वाली तथा कल्याणकारी माता हैं. उनके बारे में ये मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि
और धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं. माता दुर्गा आठ भुजाओं
से युक्त हैं और हर भुजा में कोई न कोई शस्त्रास्त्र जरुर होते है. शेर की सवारी करने
वाली माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध किया था इसलिए उन्हे महिषासुरमर्दिनी
भी कहा जाता है.
चैत्र नवरात्र का महत्व :
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार चैत्र
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था. मां दुर्गा के आदेश पर ही जगतपिता
ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था.इसलिए इस शुभ तिथि चैत्र नवरात्रि को चैत्र शुक्ल
प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ होता है. इसीलिए नवरात्रि के दिनों माँ दुर्गा
के नौ रूपों का ध्यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्येक दिन
मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन भी किया जाता है।
माता दुर्गा के हर रुप की अलग
कहानी तथा अलग ही महत्व है. देवी के जिन नौ स्वरूप की पूजा की जाती है उन नामों में
ही उनके अर्थ भी स्पष्ट होते हैं-
शैलपुत्री– इसका अर्थ पहाड़ों
की पुत्री होता है।
ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ ब्रह्मचारीणी
होता है।
चंद्रघंटा – इसका अर्थ चाँद की
तरह चमकने वाली।
कूष्माण्डा – इसका अर्थ होता है
पूरा जगत उनके पैर में है।
स्कंदमाता – इसका अर्थ कार्तिक
स्वामी की माता।
कात्यायनी – इसका अर्थ कात्यायन
आश्रम में जन्म।
कालरात्रि – इसका अर्थ काल का
नाश करने वली होता है।
महागौरी – इसका अर्थ सफेद रंग
वाली मां होता है।
सिद्धिदात्री – इसका अर्थ सर्वसिद्धि
देने वाली।
नवरात्रि का महत्व :
नवरात्रि चैत्र नवरात्रि उत्सव देवी अंबा का प्रतिनिधित्व
है. बता दू वसंत ऋतू की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत को जलवायु और सूरज के प्रभावों
के हिसाब से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए इसे मां दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र
अवसर माना जाता है. त्योहार की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती हैं
.
Sources: Prabhat Khabar


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