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भगवान शिव के 6 रूपों से मिलता है अलग-अलग वरदान



भगवान-शिव-के-6-रूप



भगवान शिव के 6 रूपों से मिलता है अलग-अलग वरदान

देवों के देव महादेव भगवान् शिव के जितने नाम हैं, उतने ही रूप हैं और हर रूप से नया वरदान मिलता है क्योंकि भगवान शिव के हर रूप के पीछे एक कहानी है….आज हम आपको भगवान शिव के 6 मुख्य रूपों के बारे में बताएंगे
भगवान शिव के पहला रूप से जुड़ी है सृष्टि के निर्माण की कहानी. आगे पढ़िये किस रूप में भगवान शिव ने संसार की रचना की थी

भगवान शिव का पहला रूप है - महादेव

  • सबसे पहले भगवान शिव ने ही अपने अंशों से तमाम देवताओं को जन्म दिया.
  •  भगवान शिव ने अपने ही अंश से शक्ति को जन्म दिया.
  •  सभी देवी देवताओं के सृजनकर्ता होने से भगवान शिव को महादेव कहते हैं.
  •  भगवान महादेव रुप की उपासना से सभी देवी देवताओं की पूजा का फल मिलता है.
  •  सोमवार को महादेव रुप की उपासना से हर प्रकार का ग्रह नियंत्रित रहता है.

भगवानशिव भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं. कोई पाखंड और कोई कर्मकांड. बस भक्त के मन की मधुर भावनाएं भगवान शिव को निहाल कर देती हैं और प्रसन्न होकर महादेव अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं तभी तो शिव को आशुतोष कहा जाता है….

भगवान शिव का का दूसरा रूपआशुतोष

  •  भगवान शिव अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं
  •  शिव जी के बहुत जल्दी प्रसन्न होने के कारण उन्हें आशुतोष कहा जाता है
  • भगवान शिव के आशुतोष रुप की उपासना से तनाव दूर होता है
  • सोमवार को शिव लिंग पर इत्र और जल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं आशुतोष
  •  आशुतोष स्वरूप की उपासना का मंत्र-  “ आशुतोषाय नमः

अतः सृष्टि के आदि भी शिव हैं और अंत भी शिव ही हैं. उग्र रूप में रुद्र और मंगलकारी रूप में शिव. संसार के संहारक भी हैं भगवान शिव, इनके इसी रूप को रुद्र कहते हैं. शिव का ये रूप जीवन को सत्य के करीब ले जाता है. रुद्र रूप में शिव कैसे करते हैं अपने भक्तों का कल्यान पढ़िए

भगवान शिव का तीसरा रूप- रूद्र

  •   भगवान शिव में संहार की शक्ति होने से उनका एक नाम रूद्र भी है.
  • उग्र रूप में भगवान शिव की उपासनारूद्रके रुप में की जाती है.
  • भगवन शिव का ये रुप इंसान को जीवन के सत्य के दर्शन कराता है.
  •  रूद्र रूप में भगवान शिव वैराग्य भाव जगाते हैं.
  • सोमवार को शिव लिंग पर कुश का जल चढ़ाकर रूद्र की पूजा होती है.

कभी तांडव करके प्रलय मचाते हैं शिवशंकर तो कभी संसार की रक्षा करने के लिए हलाहल विष पी जाते हैं. संसार के जनक भगवान शिव के इस रूप की महिमा ही अनोखी है. इस रूप में शिव अपने भक्तों की हर हाल में रक्षा करते हैं….


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भगवान शिव का चौथा रूप है - नीलकंठ

  • संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पिया था
  •  हलाहल विष पीने से भगवान शिव जी का कंठ नीला हो गया
  •   भगवान शिव के इस रुप को नीलकंठ कहा जाता है
  • शिव जी के इस रुप की उपासना करने से शत्रु बाधा दूर होती है
  • भगवन शिव के इस उपासना का मंत्र है – “ नमो नीलकंठाय

भगवान शिव का एक रूप मृत्यु पर भी विजय दिलाता है इसीलिए उनके इस रूप को मृत्युंजय कहा गया है.





भगवान शिव का पांचवां रूप  मृत्युंजय

  •  भगवान शिव के मृत्युंजय रूप की उपासना से मृत्यु को भी मात दी जा सकती है
  • मृत्युंजय रूप में भगवान शिव अमृत का कलश लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं
  •  शिव के इस आराधना से अकाल मृत्यु से बचा जा सकता है
  • मृत्युंजय की पूजा से आयु रक्षा और सेहत का लाभ मिलता है

आदिदेव महादेव तीनों लोकों के स्वामी हैं. भगवन शिव ही सृष्टि के जनक है और भगवान शिव ही सृष्टि के संहारक भी हैं मां गौरी और भगवान शिव के एकाकार होने से शिव का गौरीशंकर रूप बनता है. इस रूप की उपासना से सुखी वैवाहिक जीवन का आनंद मिलता है.

भगवान शिव का छठां रूप हैगौरीशंकर

  •   मां गौरी और भगवान शिव का संयुक्त रूप है गौरीशंकर स्वरूप
  • इस स्वरूप की उपासना से शीघ्र विवाह होता है
  • गौरीशंकर स्वरूप में शिव दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाते हैं
  • गौरीशंकर रूप की पूजा का मंत्र है:-  “ गौरीशंकराय नमः

भगवान शिव के हर रूप से अलग अलग वरदान मिलता है. भगवान शिव के नाम में हर समस्या का समाधान मिलता है तो बस शिव जी के इन रूपों की उपासना कीजिए और अपने सारे तनाव और सारी चिंताओं से मुक्त हो जाइए.







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