विष्णुजी के साथ करें शनिदेव की पूजा, शनिवार और एकादशी का योग
विष्णुजी के साथ करें शनिदेव की पूजा, शनिवार और
एकादशी का योग
शनिवार, 4 अप्रैल को चैत्र मास
के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, और इसे कामदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु
की कृपा पाने के व्रत किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार
शनिवार और एकादशी के योग में शनि देव की भी पूजा करनी चाहिए। कोरोना वायरस की वजह से
एकादशी पर अपने घर में ही पूजा-पाठ करें। घर से बाहर निकलने से बचें। जानिए एकादशी
पर घर में ही कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं...
शनि देव हैं कर्म प्रधान देवता
पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि
कर्म प्रधान देवता माने गए हैं। ये ग्रह हमें हमारे कर्मों का फल प्रदान करता है। शनि
सूर्यदेव के पुत्र हैं और इनकी माता का नाम छाया है। यमराज इनके भाई और यमुना इनकी
बहन है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल दीपक में जलाना चाहिए। और ऊँ शं
शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। शनिवार और एकादशी के योग में काले तिल, काली
उड़द और काले वस्त्रों का दान करें। अभी गर्मी के दिनों में जूते-चप्पल और छाते का
भी दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है, और किसी जरूरतमंद व्यक्ति को तेल का दान करें।
भगवान विष्णु को चढ़ाएं पीले वस्त्र
एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा
करें। पूजा में भगवान विष्णु को पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। भगवान विष्णुजी के
साथ ही महालक्ष्मी की भी पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। इसके लिए दूध
में केसर मिलाएं और शंख में भरकर विष्णु-लक्ष्मी का अभिषेक करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते
वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
एकदाशी पर फलाहार करें
जो लोग एकादशी पर व्रत करते हैं,
उन्हें इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिये। व्रत करने वाले व्यक्ति को फलाहार करना
चाहिए। अभी कोरोना वायरस की वजह से बाहर नहीं
निकल सकते हैं तो घर के मंदिर में ही पूजा करें।


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