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दिल्ली सरकार ने NPR के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया



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दिल्ली सरकार ने NPR के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया

नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव पेश किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोपाल राय ने दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अगर NPR लागू हो गया तो देश की एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित होगी.गोपाल राय ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह चाहे जितने भी आश्वासन दे, लेकिन वे  (सरकार) NRC 2003 के नियमों के तहत बाद में एनपीआर लेकर आएंगे.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने नागरिकता कानून में संशोधन किया था, जिसके बाद यह फैसला किया गया कि एनपीआर डेटा को एनआरसी के साथ जोड़ा जाएगा. इसके बाद बाद में सत्यापन होगा।






उन्होंने कहा, ‘क्या 2003 के नियमों में संशोधन किया गया है? अगर नहीं तो NPR के बाद खुद ही एनआरसी की प्रक्रिया हो जाएगी. इन मुद्दों पर हर व्यक्ति तनाव में है. असम में एनआरसी का उल्लेख करते हुए राय ने कहा कि एनआरसी और एनपीआर का धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है.

बता दें आपको असम में  जारी हुई एनआरसी की अंतिम सूची में हिंदुओं और मुस्लिमों सहित 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया था.


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गोपाल राय ने एनपीआर, एनआरसी और सीएए को लेकर केंद्रीय मंत्रालय के विरोधाभासी बयानों की आलोचना करते हुए कहा की, ‘लोगों के दिमाग में एनपीआर और एनआरसी को लेकर कई सवाल हैं क्योंकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने इन मुद्दों पर अलग-अलग बयान दिए हैं.’ उन्होंने कहा की, ‘कल गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि एनपीआर का एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं है इसलिए लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. इससे पहले वह क्रोनोलॉजी समझाते रहे हैं.’

इस प्रस्ताव को पेश करते हुएगोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में एनपीआर अपडेशन के काम को रोक देना चाहिए और अगर केंद्र सरकार चाहे तो एनपीआर की प्रक्रिया को 2010 के फॉर्मेट के अनुरूप लागु किया जाना चाहिए.






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